CID कैसे ज्वाइन करे - How to Become a CID Officer in Hindi

How to Become a CID Officer in Hindi – आजकल हर कोई डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहता है, पर बहुत से लोग वो भी हैं जो कुछ हट के सोचते हैं, यानि जो सीआईडी ऑफिसर बनना चाहते हैं. सीआईडी ऑफिसर, सीआईडी डिपार्टमेंट  भारत सरकार के लिए Detective agency का कार्य करते है, कई सारे स्टूडेंट इस फील्ड में जाना पसंद करते है। इस फील्ड में जाने के लिए आपके अंदर Activism, दिमाग तेज और किसी भी काम को करने की एवं खोज निकालने capacity होनी चाहिए। यदि आप इस फील्ड में जाने के लिए तैयार है तो आपको बचपन से ही तैयारी करना चाहिए, कहने का मतलब 8-10th Class से ही आपको तैयारी में लग जाना चाहिए।


How to Become a CID Officer in Hindi – 
सीआईडी ऑफिसर बनना कोई आसान काम नहीं, लेकिन अगर सच्ची मेहनत करे तो ये नामुमकीन भी नहीं है। हमारे देश में कई सारे CID Officers है, वो अपनी मेहनत और लगन से उस मुकाम पर पहुंचे है, CID  पुलिस का ही डिपार्टमेंट है, जो गुप्त तरीकों से क्रिमिनल्स का पता लगाते है। सीआईडी ऑफिसर बनने के लिए क्या क्या करना पड़ता है, कौन कौनसी एजुकेशनल योग्यता होनी चाहिए इसकी जानकारी हम आगे जानते है।

सीआईडी ऑफिसर बनने के लिए एजुकेशनल क्वालिफिकेशन:-

  • सीआईडी ऑफीसर बनने के लिए उम्मीदवार को सबसे पहले भारतीय नागरिक होना ज़रूरी है.
  • उम्मीदवार को बारवी कक्षा (12th Class) पास होना ज़रूरी है,
  • अगर कोई उम्मीदवार एक हाई पोस्ट पर जाना चाहता है, तो उसके लिए उम्मीदवार को किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी स्ट्रीम में ग्रेज़ुएशन होना ज़रूरी है.
  • CID के एग्जाम के लिए महिला और पुरुष दोनों ही आवेदन कर सकते हैं.

सीआईडी ऑफिसर बनने के लिए आयु सीमा:-

  • जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार को 20 से 27 वर्ष के बीच होना चाहिए.
  • SC/ST कैटेगरी के उम्मीदवारों को 20 से 32 वर्ष के बीच होना चाहिए.
  • OBC कैटेगरी के उम्मीदवारों को 20 से 30 वर्ष के बीच होना चाहिए.

सीआईडी ऑफिसर बनने के लिए उमीदवार कितनी बार attempt कर सकता? 

सीआईडी ऑफिसर बनने के लिए उमीदवार सिर्फ कुछ ही बार ही कोशिश कर सकता है जैसे:-
  • जनरल कैटेगरी के उमीदवार 4 बार प्रयास कर सकते है।
  • ओबीसीकैटेगरी के उमीदवार 7 बार प्रयास कर सकते है।
  • एससी/एसटी कैटेगरी के उमीदवार के लिए कोशिश करने की कोई लिमीट नहीं है।

सीआईडी ऑफिसर के लिए चयन प्रक्रिया-Selection Process for CID Officer:- 

सीआईडी ऑफिसर बनने के लिए हमें बहुत ही टफ एग्जाम से गुजरना पड़ता है, क्योंकी डिटेक्टिव का अर्थ ही जासूसी, गुप्तचर, पता लगनेवाला आदमी होता है, इसलिए एग्जाम में आपको कुछ कुछ ऐसे अनसुलझे भी प्रश्न आते है जिनका जवाब आजतक नहीं मिला है।
उम्मीदवारों का सिलेक्शन Written Exam और personal interview और Physical Effective Test  के आधार पर किया जाता है, सबसे पहले उम्मीदवारों की लिखित परीक्षा होगी, उसके पश्चात उम्मीदवारों का शारीरिक टेस्ट और जब उम्मीदवार इन दोनों परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर लेंगे उसके बाद उम्मीदवारों को इंटरव्यू (Interview) के लिए बुलाया जायेगा.

सीआईडी ऑफिसर परीक्षा के लिए परीक्षा पैटर्न:- 

CID एग्जामिनेशन हर साल UPSC और SSC द्वारा हर साल कराया जाता है, सीआईडी Examination Question Paper को दो parts में divide जाता है. part 1 में 200 marks का question paper आता है और question paper को solve करने के लिए पुरे 2 घण्टे का समय दिया जाता है. Part 2 में 400 marks का question paper आता है, जिसके लिए आपको पुरे 4 घण्टे का समय दिया जाता है. और उसके बाद 100 marks का इंटरव्यू (Interview) होता है

CID की  Salary कितनी होती है?: 

CID में जो लोग है उनमे से ACP 9 lacs पर day लेता है Abhijeet 8 lacs पर day लेता है Daya 12 lacs पर day लेता है क्यूंकि उसको दरवाज़े भी तोड़ने होते है, Freddy  8 lacs पर day लेता है, ये तो नकली CID की सेलरी है असल में CID ऑफिसर की सलेरी 24 हजार से 40 हजार के बीच में होती है.

CID की Ranks/ Positions:- 

The head of the CID in police forces is Additional Director General of Police (ADGP).
  • Additional Director General of Police (ADGP)
  • Inspector general of police (IGP)
  • DIG
  • SP
  • DSP
  • Inspector
  • Superintendent
  • Sub Inspector
  • Constable

कैसे करे तैयारी सीआईडी ऑफिसर बनने के लिये?: 


अगर आप चाहते हैं की आप एक सीआईडी ऑफिसर बनें तो उसके लिए सबसे पहले सीआईडी ऑफिसर्स की पूरी जानकारी प्राप्त करले उसके बाद अपनी तैयारी शुरू करे.
  • सीआईडी ऑफिसर का काम बहुत ही कठिन होता है, इसलिए अगर आप चाहते है सीआईडी बनना तो अपने आप को बचपन से मजबूत बनाकर रखे.
  • सीआईडी ऑफिसर बनने के लिए अपने दिमाग को बहुत तेज बनाना होगा, 24 घण्टे आपका दिमाग खुला होना चाहिए अर्थात हमेशा आपके दिमाग में अपने काम की बाते चलती रहनी चाहिए.
  • अपनी अच्छी तैयारी के लिए सीआईडी से सम्बन्धित टीवी में आने वाले नाटक देखें. उससे आपकी तैयारी अच्छी होगी.
  • अपने बोलने के तरीके को बदले अर्थात अपनी आवाज में थोड़ा बहुत कड़कपन लाए.
  • अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए अपने सीनियर्स की मदद लें, उनसे जानकारी प्राप्त करे.



ट्रैफिक नियमों से जुड़े अधिकार - Traffic Rules in Hindi
Traffic Rules in Hindi 
हमारे शहर में आए दिन पुलिस हर चौराहे पर खड़ी होकर Traffic Rules को तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ कार्यवाही करती है और उनसे Traffic Rules तोड़ने के बदले में जुर्माना वसूला जाता है। लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं कि किसी भी ट्रैफिक हवलदार को आपकी गाड़ी से चाबी निकालने का कोई भी अधिकार नहीं होता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही ट्रैफिक नियम के बारे में जिनके बारे में आप नहीं जानते हैं।


#1.अगर सड़क पर चलते समय कोई ट्रैफिक हवलदार आपकी गाड़ी को रोककर आपसे पेपर्स दिखाने की मांग करता है तो आप उसे साफ-साफ मना कर सकते हैं। इतना ही नहीं, आप उसके सीनियर अथॉरिटी से उसकी कम्प्लेंट भी कर सकते हैं। ट्रैफिक लॉ के अनुसार, एएसआई रैंक या उससे बड़े पद का कोई अधिकारी ही आपसे आपकी गाड़ी के कागज मांगने का अधिकार रखता है।

#2.किसी भी ट्रैफिक हवलदार को आपको अरेस्ट करने या आपका वाहन जब्त करने का अधिकार भी नहीं होता है। बल्कि वह आपसे पॉल्यूशन अंडर-कंट्रोल पेपर्स (पीयूसी) भी नहीं मांग सकता है क्योंकि यह अधिकार सिर्फ आरटीओ ऑफिशियल्स का होता है। अगर आप किसी तरह का यातायात नियम तोड़ते हैं तब भी उस हवलदार को आपकी गाड़ी से चाबी निकालने का कोई अधिकार नहीं होता है।

#3.यातायात नियम तोड़ने पर आपसे पेनल्टी भी सिर्फ असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर(वन स्टार), सब-इंस्पेक्टर(टू-स्टार) और पुलिस इंस्पेक्टर(थ्री स्टार) ही वसूल सकते हैं। ट्रैफिक हवलदार सिर्फ उनकी मदद कर सकता है लेकिन आपसे पेनल्टी नहीं वसूल सकता। ( द इंडियन मोटर व्हीकल एक्टसेक्शन 132)

#4.अगर पुलिस आपको सिग्नल तोड़ने के दौरान, आपकी गाड़ी पर दो से अधिक लोगों के बैठे होने के दौरान, भार वाहक (Load carrier) वाहनों में सवारी बिठाने के दौरान, शराब या किसी और प्रकार का नशा करके गाड़ी चलाने के दौरान, मोबाइल पर बात करने के दौरान और तेज बाइक चलाने के दौरान आपको पकड़ती है तो ऐसे मामलों में ट्रैफिक पुलिस को आपका लाइसेंस जब्त करने का अधिकार दिया गया है।

#5.अगर आप यातायात नियम तोड़ते हुए पकड़े जाते हैं तो आप पर फाइन लगाया जाता है। लेकिन आप पर 100 रुपये से ज्यादा का फाइन लगाने का अधिकार सिर्फ एएसआई या एसआई का ही होता है। हेड कॉन्स्टेबल आप पर 100 रुपये से ज्यादा का फाइन नहीं लगा सकता है और कॉन्स्टेबल को आप पर किसी भी तरह का फाइन लगाने का कोई अधिकार नहीं होता है।

#6.अगर कोई ट्रैफिक पुलिस वाला बिना वर्दी पहने आपका चालान काटता है तो उसे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं होता है। आपको बता दें कि ट्रैफिक पुलिस में कॉन्स्टेबल से लेकर एसआई तक सभी सफेद रंग की वर्दी पहनते हैं, और ट्रैफिक इंस्पेक्टर और उससे बड़े पद का अधिकारी खाकी वर्दी पहनता है।

#7.आपको अपने घर से निकलते समय अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट(आरसी), गाड़ी का इन्श्योरेंस सर्टिफिकेट और पॉल्यूशन अंडर-कंट्रोल सर्टिफिकेट(पीयूसी) और अपना ड्राइविंग लाइसेंस हमेशा अपने साथ रखना चाहिए। आपको बता दें कि चैकिंग के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस और पीयूसी ऑरिजनल होने चाहिए या डिजिटल लाकर में होने चाहिए, जबकि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और इन्श्योरेंस सर्टिफिकेट की फोटो कॉपी भी चलेगी।

#8.अगर आपने अपनी गर्दन के ऊपरी हिस्से मतलब कान या किसी अन्य जगह की सर्जरी करवा रखी है या आप पगड़ी पहनने वाले सिख समुदाय से है तो आपके लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं है

#ट्रैफिक पुलिस कैसे कितनी तरह के चालान वसूलती है? : 

ट्रैफिक पुलिस आपसे तीन तरह से चालान वसूल सकती है –

ऑन द स्पॉट चालान : 

अगर आप नियम तोड़ते हुए रंगे हाथों पकड़े जाते हैं तो आपसे तुरंत चालान काटकर पेनल्टी वसूली जाती है। अगर आप किसी कारणवश तुरंत पेनल्टी नहीं भर सकते हैं तो पुलिस आपका ड्राइविंग लाइसेंस अपने पास रखकर आपको चालान दे देती है जिसे भरने के बाद आपको आपका ड्राइविंग लाइसेंस दौबारा दे दिया जाता है।

नोटिस चालान : 

अगर आप किसी ट्रैफिक के नियम को तोड़कर भाग जाते हैं तो ऐसी स्थिति में आपकी गाड़ी का नम्बर नोट करके चालान गाड़ी मालिक के घर पर पहुंचा दिया जाता है। जिसे भरने के लिए एक महीने का समय दिया जाता है अगर आप इस एक महीने में इस चालान को नहीं भरते हैं तो इसे कोर्ट भेज दिया जाता है।

कोर्ट का चालान : 

इस चालान को ज्यादातर किसी यातायात के नियम को तोड़ने पर ही बनाया जाता है। इस चालान में पेनल्टी के साथ-साथ सजा का भी प्रावधान है। उदाहरण के लिए अगर आप किसी प्रकार का नशा करने के बाद गाड़ी चलाते हुए पकड़े गए तो ऐसी स्थिति में चालान तो ऑन द स्पॉट ही बनेगा लेकिन उसकी पेनल्टी को भरने के लिए आपको कोर्ट जाना पड़ेगा।

कुछ सवाल-जवाब – Question & Answer related to Traffic Rules in Hindi


#1.नशे में गाड़ी चलाने पर क्या सजा है? – 

अगर कोई ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चला रहा है और उसके खून में ऐल्कॉहॉल की मात्रा 30 एमजी प्रति 100 एमएल से ज्यादा है या उसने इतनी मात्रा में ड्रग्स लिया हुआ है कि उसका व्हीकल पर नियंत्रण नहीं रह सकता, तो उसे नशे की हालत में गाड़ी चलाने का आरोपी माना जाता है। पहली बार यह जुर्म करने पर आरोपी को छह महीने तक की जेल या दो हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। अगर पहले जुर्म के तीन साल के अंदर कोई दोबारा ऐसा करता है तो उसे दो साल तक की जेल या तीन हजार रुपये तक का फाइन या दोनों हो सकते हैं। अब पुलिस ऐसे शख्स का लाइसेंस भी तीन महीने के लिए जब्त कर सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस ऑन द स्पॉट फाइन नहीं करती। सभी चालान कोर्ट भेजे जाते हैं और कोर्ट ही फाइन लगाती है। अगर आप दी गई तारीख को कोर्ट में पेश नहीं होते हैं तो आपको समन और वॉरंट जारी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में गिरफ्तारी भी हो सकती है।

#2.मान लें, मुझे शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में पकड़ लिया गया। चालान कटवाने के बाद क्या मैं खुद ड्राइव करके जा सकता हूं? – 

नहीं। आपको किसी दूसरे ड्राइवर की मदद लेनी होगी, जो नशे में न हों या फिर अपनी कार को पुलिस के पास छोड़कर कैब लेकर जाना होगा। कोर्ट कार्यवाही पूरी होने पर आपकी कार वापस मिलेगी।

#3.मैं चाहता हूं कि शराब इतनी ही लूं कि गाड़ी ड्राइव करके जा सकूं। इस लिमिट का अंदाजा कैसे लगाया जा सकता है? – 

ऐसा कोई पक्का नियम तो नहीं है, लेकिन मोटे तौर पर माना जाता है कि बियर की एक बोतल/30 एमएल विस्की या रम आपको मान्य लिमिट यानी 30 यूनिट के नीचे रखती है। इससे ज्यादा लेने पर आप लिमिट पार कर जाते हैं। वैसे, हमारा शरीर भी एक घंटे में 10 यूनिट बर्न कर देता है। कुल मिलाकर यह सब इस पर भी निर्भर करेगा कि आपने पीने के कितनी देर बाद गाड़ी चलाना शुरू किया है। अगर ज्यादा पी रहे हैं तो ज्यादा देर से ड्राइविंग शुरू करें।

#4. पुलिसवाले वीइकल को जब्त कर सकते हैं? अगर हांतो किन स्थितियों में?  

ट्रैफिक पुलिसवाले नीचे दी गई स्थितियों में गाड़ी को जब्त कर सकते हैं: अगर कोई बिना वैलिड लाइसेंस के गाड़ी चला रहा है। अगर कोई नाबालिग गाड़ी चला रहा है। अगर वीइकल को बिना रजिस्ट्रेशन के चलाया जा रहा है। ट्रांसपोर्ट वीइकल को बिना वैलिड परमिट के चलाया जा रहा है।

#5.ट्रैफिक सिग्नल यलो था और उसी वक्त मैंने स्टॉप लाइन क्रॉस कर दीलेकिन आगे ट्रैफिक होने के कारण जंक्शन क्रॉस नहीं कर पाया। इसी बीच लाइट रेड हो गई। मेरे ऊपर सिग्नल जंप करने का फाइन लग गया। क्यों?  

यलो सिग्नल सिर्फ उन लोगों के लिए है, जो पहले ही स्टॉप लाइन क्रॉस कर चुके हैं और जंक्शन क्रॉस करने वाले हैं। अगर ग्रीन लाइट यलो में बदल गई है तो आपको स्टॉप लाइन क्रॉस करने का हक नहीं है। यलो लाइन है तो फौरन रुकें, क्रॉस करने की कोशिश करेंगे तो नियम का उल्लंघन होगा।

#6.मेरी मौजूदगी में किसी गाड़ी वाले ने किसी को टक्कर मार दी। मैं क्या करूं?  

आप इस घटना के Eye Witness हो गए। आपको शिकार हुए शख्स की मदद करनी चाहिए और ऐक्सिडेंट करने वाले की गाड़ी का नंबर नोट कर पुलिस को सूचना देनी चाहिए। आपकी ही तरह के दूसरे लोग भी वहां होंगे, उन्हें ऐक्सिडेंट करने वाले के साथ मारपीट करने या उसके वाहन को नुकसान पहुंचाने का हक नहीं है। उन्हें पुलिस को ही सूचना देनी चाहिए। आपको प्रो-ऐक्टिव होना चाहिए, डिस्ट्रक्टिव नहीं।

#7.अगर हमारी गाड़ी से किसी का ऐक्सिडेंट हो जाए तो हमें क्या करना चाहिए?  

पुलिस को सूचित करें और फौरन उस शख्स को मेडिकल हेल्प मुहैया कराएं। अगर आपकी गाड़ी में कोई खतरनाक (पेट्रोल या ऐसा ही कुछ जल्दी आग पकड़ने वाला) सामान ढोया जा रहा है तो आसपास के लोगों को वीइकल से दूर कर दें और स्मोकिंग न करें।

#8.ट्रैफिक नियम तोड़ने के आरोप में जब पुलिसवाले किसी को रोकते हैं तो उसकी गाड़ी की चाबियां निकाल लेते हैं। क्या यह सही है? – 

ऐसा वे इसलिए करते हैं, क्योंकि लोग भागने की कोशिश करते हैं और अपनी और दूसरों की जिंदगी खतरे में डालते हैं। वैसे, चाबी निकालने का हक ट्रैफिक पुलिस वालों को नहीं है। ऐसा करना सही प्रैक्टिस नहीं माना जाता

#9.किस गुनाह के लिए कितना जुर्माना? : 

डिफेक्टिव नंबर प्लेट 100 रुपये, बिना सीट बेल्ट के ड्राइविंग 100 रुपये, गलत जगह पार्क करना 100 रुपये, रेड लाइट जंप करना 100 रुपये, इंडिकेटर दिए बगैर मुड़ना 100 रुपये, पीयूसी के बिना गाड़ी चलाना 100 रुपये, प्रेशर हॉर्न का प्रयोग 100 रुपये, बिना हेलमेट टूवीलर चलाना या पीछे बैठना 100 रुपये, गाड़ी पर अवैध तरीके से लाल बत्ती लगाना 100 रुपये, टू वीलर पर तीन सवारी 100 रुपये।

इनमें होता है 100 रुपये से ज्यादा का जुर्माना:- 

ओवरस्पीडिंग 400 रुपये, बिना लाइसेंस के ड्राइविंग 500 रुपये, नाबालिग का ड्राइविंग करना 500 रुपये, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल पर बात 1000 रुपये, ट्रैफिक इंस्पेक्टर से दुर्व्यवहार 1000 रुपये, बिना इंश्योरेंस के ड्राइविंग 1000 रुपये, बिना रजिस्ट्रेशन गाड़ी चलाना 2000 रुपये, ऑड-ईवन का नियम तोड़ने पर 2000 रुपये।

What is Article 370 in Constitution in Hindi - संविधान का आर्टिकल 370 क्या है?

What is Article 370 in Constitution in Hindi - भारतीय संविधान का आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को Special status provide करता है। आर्टिकल 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद यानी आर्टिकल है, जो जम्मू-कश्मीर को दूसरे राज्यों के मुकाबले कुछ Special rights provide करता है


क्या है आर्टिकल 370 : 

भारतीय संविधान का आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को Special status provide करता है। आर्टिकल 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद यानी आर्टिकल है, जो जम्मू-कश्मीर को दूसरे राज्यों के मुकाबले कुछ Special rights provide करता है। भारतीय संविधान में Temporary, transitional और Special provision से जुड़े भाग 21 का आर्टिकल 370 जवाहरलाल नेहरू के Special intervention से तैयार किया गया था।

  • 15 अगस्त 1947 की आजादी के बाद देश कई सारी छोटी-छोटी रियासतों में बंटा हुआ था। जिसे सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपनी कोशिशों से सभी रियासतों को एक सूत्र में बांधतें हुए भारतीय संघ (Indian Union) की स्थापना की। 1947 में बटवारे के समय जब जम्मू-कश्मीर को भारतीय संघ में शामिल करने का प्रोसेस शुरू हुआ तब जम्मू-कश्मीर के राजा हरिसिंह आज़ाद रहना चाहते थे। इसी दौरान 22 अक्टूबर 1947 को कबाइली लुटेरों के भेष में पाकिस्तानी सेना ने वहां हमला कर दिया जिसके बाद राजा हरिसिंह ने भारत में विलय के लिए सहमति दी।

कैसे बना था आर्टिकल 370 : 

सरदार पटेल के दूत यानि गोपालस्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में जम्मू-कश्मीर की शर्तो को मिलाकर बनाये गए आर्टिकल 306-A का format पेश किया, जो बाद में आर्टिकल 370 बन गया। जिसके बाद विलय की शर्तों की वजह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिल गए। जिसके बाद से कश्मीर के स्पेशल स्टेटस और अधिकार को आमतौर पर आर्टिकल 370 के नाम से जाना जाता है। 1951 में राज्य को संविधान सभा अलग से बुलाने की अनुमति दी गई। नवंबर 1956 में राज्य के संविधान का कार्य पूरा हुआ। 26 जनवरी 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया।

जम्मू कश्मीर के पास क्या विशेष अधिकार (Special rights) हैं

1.आर्टिकल 370 के provisions के मुताबिक Parliament को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है।
2.किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की सहमति लेनी पड़ती है।
3.राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।
4.1976 का शहरी भूमि कानून भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
5.भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
6.भारतीय संविधान का आर्टिकल 360 यानी देश में वित्तीय आपातकाल (Financial emergency) लगाने वाला प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता.

जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करना उस वक्त की बड़ी जरूरत थी। इस कार्य को पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर की जनता को उस समय आर्टिकल 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार दिए गए थे। इसी की वजह से यह राज्य भारत के अन्य राज्यों से अलग है।

आर्टिकल 370 की बड़ी बातें

1.जम्मू-कश्मीर का झंडा अलग होता है।
2.जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है।
3.जम्मू-कश्मीर में भारत के National flag or national symbols का अपमान अपराध नहीं है।
4.जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाएगी।
5.यदि कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती है, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है।
6.आर्टिकल 370 के कारण कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है।
7.जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
8.जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल होता है। जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 साल होता है।
9.भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के संबंध में बहुत ही सीमित दायरे में कानून बना सकती है।
10.जम्मू-कश्मीर में पंचायत के पास कोई अधिकार नहीं है।
11.आर्टिकल 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू नहीं होता।
12.जम्मू-कश्मीर में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) लागू नहीं होता है। यहां सीएजी (CAG) भी लागू नहीं है।
13.कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता है।

1947 को विभाजित भारत आजाद हुआ। उस दौर में भारतीय रियासतों के विलय का कार्य चल रहा था, जबकि पाकिस्तान में कबाइलियों को एकजुट किया जा रहा था। इधर जूनागढ़, कश्मीर, हैदराबाद और त्रावणकोर की रियासतें विलय में देर लगा रही थीं तो कुछ स्वतंत्र राज्य चाहती थीं। इसके चलते इन राज्यों में अस्थिरता फैली थी।
  • जूनागढ़ और हैदराबाद की समस्या से कहीं अधिक जटिल कश्मीर का विलय करने की समस्या थी। कश्मीर में मुसलमान बहुसंख्यक थे लेकिन पंडितों की तादाद भी कम नहीं थी। कश्मीर की सीमा पाकिस्तान से लगने के कारण समस्या जटिल थी अतः जिन्ना ने कश्मीर पर कब्जा करने की एक योजना पर तुरंत काम करना शुरू कर दिया। हालांकि भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो चुका था जिसमें क्षेत्रों का निर्धारण भी हो चुका था फिर भी जिन्ना ने परिस्थिति का लाभ उठाते हुए 22 अक्टूबर 1947 को कबाइली लुटेरों के भेष में पाकिस्तानी सेना को कश्मीर में भेज दिया। वर्तमान के पाक अधिकृत कश्मीर में खून की नदियां बहा दी गईं। इस खूनी खेल को देखकर कश्मीर के शासक राजा हरिसिंह भयभीत होकर जम्मू लौट आए। वहां उन्होंने भारत से सैनिक सहायता की मांग की, लेकिन सहायता पहुंचने में बहुत देर हो चुकी थी।
  • भारत विभाजन के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ढुलमुल नीति और अदूरदर्शिता के कारण कश्मीर का मामला अनसुलझा रह गया। यदि पूरा कश्मीर पाकिस्तान में होता या पूरा कश्मीर भारत में होता तो शायद परिस्थितियां कुछ और होतीं। लेकिन ऐसा हो नहीं सकता था, क्योंकि कश्मीर पर राजा हरिसिंह का राज था और उन्होंने बहुत देर के बाद निर्णय लिया कि कश्मीर का भारत में विलय किया जाए। देर से किए गए इस निर्णय के चलते पाकिस्तान ने गिलगित और बाल्टिस्तान में कबायली भेजकर लगभग आधे कश्मीर पर कब्जा कर लिया।

How to Complain in Consumer Court - उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज़ कैसे करे

How to Complain in Consumer Court - consumer protection act की धारा 12 के तहत शिकायत कर सकते है, आप खुद  या अपने वकील द्वारा डिस्ट्रिक्ट, स्टेट या नेशनल कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकते हैं


Consumer protection act 24 दिसंबर 1986 को लागु हुआ था यह भारत में consumers के हितों की रक्षा करने के लिए बनाया गया था

कन्जूमर कौन है:-  

consumer protection act के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो किसी गुड या सर्विस को उपयोग या उपभोग के लिए खरीदा है वह कंजूमर है| जब कोई सेलर कोई वस्तु या सेवा गलत जानकारी के साथ बेचता है या छपी हुई वस्तु के मूल्य से ज्यादा मूल्य लेता है या वह वस्तु या सेवा उसकी जानकारी के अनुसार खरी नहीं उतरती है तो उसे खरीदने वाला कंजूमर होता है वह इस अधिनियम के अनुसार अपनी शिकायत कर सकता है|

ऐसी शिकायत में वह अपने प्रोडक्ट को बदल कर ले सकता है या उस प्रोडक्ट का price जुरमाने के साथ सेलर से ले सकता है. इस कानून के तहत सभी तरह की सेवाएं आती है जो कि एक ग्राहक पैसा देकर खरीदता है चाहे वह सरकारी हो या गैर सरकारी. जैसे अगर हम रेलवे या किसी प्लेन में सफर कर रहे हो तो वह सेवा भी इस अधिनियम के अंतर्गत आती है कोई भी टेलीफोन सेवा या किसी दुकानदार से कोई सामान खरीदना या पैसे के बदले में किसी प्रकार की कोई सर्विस लेना वह सब इस कानून और अधिनियम के अंतर्गत आता है

शिकायत कैसे करें:- 

आप consumer protection act की धारा 12 के तहत शिकायत कर सकते है, आप खुद  या अपने वकील द्वारा डिस्ट्रिक्ट, स्टेट या नेशनल कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकते हैं

  • एक सादे कागज पर शिकायतकर्ता व Opposition parties का नाम,  विवरण और पता
  • शिकायत से जुड़े फैक्ट्स यह कब कहा उठी और उसका prevention क्यों नही हुआ उसका कारण
  • शिकायत व आरोपों के समर्थन में डाक्यूमेंट्स
  • शिकायतकर्ता द्वारा मांगी जा रही राहत जुरमाने सहित लिखी हो
  • शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर इसके साथ एक एफिडेविट जिसमें यह लिखा हो कि सब तथ्य सत्य है
  • न्यायालय शुल्क उस राज्य के अनुसार


केस डालने की समय सीमा:- 

consumer protection act की धारा 24 A के अनुसारशिकायतकर्ता को केस 2 साल के अंदर फाइल कर देना चाहिये वैसे इसके बाद भी केस देरी के कारण के साथ फ़इल हो सकता है

शिकायत कहां करें:- 

आप 20 लाख रुपए से कम मूल्य की वस्तु के लिए District Consumer Forum में और 20 लाख रुपए से अधिक लेकिन एक करोड रुपए से कम वस्तु के लिए state commission consumer court में और एक करोड रुपए के मूल्य से अधिक के लिए आप National Consumer Commission (NCDRC) में शिकायत कर सकते हैं

शिकायत कितने दिन में निपट सकती है?: 

शिकायत का निपटान consumer protection act section 13(3A) के अनुसार opposite party को notice मिलने के बाद कम से कम 3 महीने और ज्यादा से ज्यादा 5 महीने के अंदर निपट जाना चाहिए लेकिन जैसा कि आप जानते हैं ऐसा नहीं होता है क्योंकि कोर्ट में काफी सारे केस पेंडिंग होते हैं तथा कोर्ट की work Category इस प्रकार की है कि इसमें 1 से 3 साल तक लग जाते हैं|  लेकिन फिर भी आप इस धारा के तहत कोर्ट में एप्लीकेशन लगा कर अपना केस जल्दी निपटाने के लिए एप्लीकेशन लगा सकते हैं और कोर्ट पर दबाव बना सकते है |

केस मे Compensation और Punishment:- 

consumer protection act section 27 के अनुसार अदालत दोषियो को 1 महिने से लेकर 3 साल तक कि सजा सुना सकती है साथ ही 2 हजार से लेकर 20,000 तक का जुर्माना भी लगा सकती है तथा अपनी special power को इसतेमाल करके जुर्माने को ज्यादा भी कर सकती है और धारा 25 के तहत दोषियो कि चल व अचल प्रॉपर्टी को जब्त भी कर सकती है.

क्या डॉक्टरों पर consumer protection act लागु होता है?:

डॉक्टर हो या हॉस्पिटल सभी पर consumer protection act लागु होता है, डॉक्टर हो या अस्पताल इन सभी पर डेफिशियेंसी इन सर्विस एंड ट्रेड प्रैक्टिस (Deficiency in service and unfair trade practice Act) भी लागु होता है और medical Negligence का केस भी बन सकता है. आज हॉस्पिटल में इलाज कम दुकान ज्यादा खुल गए है और पैसे के उगाही का ज़रिया भी बन गया है. आप शिकायत करे कोर्ट द्धारा॑ Authorized डॉक्टर पर केस बनेगा और डॉक्टर द्धारा॑ मरीज को मुआवजा देना पड़ेगा और जेल भी जाना पड़ सकता है.


  • आप लोग डॉक्टर के बारे में मेडिकल कोंसिल को भी कंप्लेंट कर सकते हो और डॉक्टर का license कैंसिल करवा सकते हो
  • consumer protection act के अलावा I.P.C. में भी इसके लिए provision है
  • आप सीधा हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में में रिट लगा कर भी आप लोग इन्हे सजा करवा सकते है व compansassion ले सकते है



What is Rent Agreement in Hindi - रेंट एग्रीमेंट क्या होता है और कैसे बनाया जाता है?

Rent Agreement in Hindi -
जब किसी प्रॉपर्टी को किराए पर देने से पहले किराएदार और मकान मालिक एक लिखित समझौते को तैयार करते है वो रेंट एग्रीमेंट कहलाता है



आज के समय में किराया आमदनी का एक अच्छा साधन है आज जहां आप अपनी खाली पड़ी कोई भी प्रॉपर्टी या मकान किराए के लिए देकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते है तो दूसरी तरफ किराए के मकान उन लोगों के लिए वरदान है जो पैसे ना होने के कारण अपना घर नहीं बना पाते हैं लेकिन किराए की प्रॉपर्टी लेते देते समय कुछ महत्वपूर्ण बातें होती हैं जो हम लिखित में एग्रीमेंट के द्वारा करते हैं

किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट क्या होता है:- 

  • जब किसी प्रॉपर्टी को किराए पर देने से पहले किराएदार और मकान मालिक एक लिखित समझौते को तैयार करते है वो रेंट एग्रीमेंट कहलाता है| रेंट एग्रीमेंट में मकान किराया पर लेने व देने संबंधी लिखित शर्ते होती है जिस पर मकान मालिक और किराएदार दोनों की सहमति से हस्ताक्षर होते हैं जो भविष्य में अच्छे तालमेल के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होते है अगर किसी भी प्रकार का बदलाव मकान मालिक या किराएदार की तरफ से हो तो इसको भी इसके अनुसार पूरा किया जा सकता है रेंट एग्रीमेंट से सम्बन्धित शर्ते व नियम लिखित होने चाहिये.
  • अगर आप किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट नोटरी से बनवाना चाहते है तो हमेशा 100 रूपए के स्टांप पेपर पर ही बनवाए कई लोग 50 रूपए के स्टाम्प पेपर पर ही रेंट एग्रीमेंट बनवा देते है जो की गलत है क्योकि स्टाम्प पेपर एक्ट के अनुसार कोई भी जनरल अग्रीमेंट 100 रूपए के स्टाम्प पेपर पर ही मान्य है
  • किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट किस दिन और किस तारीख को बनाया जा रहा है तथा प्रॉपर्टी कितने समय के लिए रेंट पर दी जा रही है उसे भी लिखना बहुत जरुरी है
  • स्टांप पेपर पर मकान मालिक और किराएदार दोनों के हस्ताक्षर अनके आधार कार्ड के साथ होने जरूरी है
  • कोई भी किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट बिना गवाहों के पूरा नही माना जाता इसके लिए दो गवाह भी होने जरूरी है
  • किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट में किराएदार और मकान मालिक दोनों का नाम और पता साफ-साफ लिखा होना चाहिये इसमें किराएदार का पुराना पता (जहा वह पहले रहता हो) या उसके पास जो आधार कार्ड हो उस पर लिखा हुआ पता होना जरूरी है तथा जो जगह किराए पर दी जा रही है उसका भी पूरा पता साफ लिखा होना चाहिये
  • मकान का किराया देने की समय अवधि और तारीख भी लिखी होनी चाहिए अगर रेंट देने में किसी प्रकार की देरी हो तो उसके लिए भी कितनी पेनल्टी होगी वो भी किनते समय की देरी के लिए ये लिखा होना चाहिये
  • किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट में मकान मालिक को किराया किरायेदार द्वारा दिये जाने वाली सिक्योरिटी मनी का भी उल्लेख होना चाहिए
  • अगर मकान मालिक किसी प्रकार की सुविधा किराएदार को प्रदान करता या क्या-क्या सुविधाएं मकान में प्रदान की जा रही है जैसे कि पंखा गीजर लाइट फिटिंग इत्यादि रिपेयरिंग उसका भी उल्लेख रेंट एग्रीमेंट में होना चाहिए तथा उन सुविधाओं के अभाव में क्या निवारण हो वो भी लिखा हो जैसे की बिलजी, पानी की मोटर का रख रखाव व समय पर वाइट वाश होना व सुरक्षा सम्बन्धित कारण इत्यादी
  • किराएदार घर छोड़े या मकान मालिक उससे अपना घर छोड़ने को कहे इसके लिए एक महीने का लीगल नोटिस दिया जाना जरूरी है किराएदार या मकान मालिक एक महिना या इससे से ज्यादा का जो भी सुविधाजनक हो उसका उल्लेख रेंट अग्रीमेंट में होना जरूरी है
  • समय के अनुसार किराया बढ़ोतरी का उल्लेख भी इसमें होना चाहिए जैसे की ज्यादातर लोग हर साल 10 % रेंट बड़ा देते है इस प्रकार की अगर कोई शर्त है तो उसका उल्लेख इस अग्रीमेंट में होना चाहिये
  • किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट को आगे बड़ाने के लिए पहले कितने दिन का नोटिस दिया जाये जोकि ज्यादातर एक महीने का होता है उसका उल्लेख किया होना भी जरूरी है

जरूरी बाते जो की रेंट अग्रीमेंट से पहले जरूरी है :-

1.पक्षकारों की सक्षमता :- 

किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट जिन दो लोगो के बिच हो रहा हो वो दोनों शारीरिक व मानसिक रूप से इस अग्रीमेंट को करने के लिए सक्षम हो तथा दोनों 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हो और किसी भी प्रकार के दबाव में नही हो

2.अग्रीमेंट की समय सीमा व उसका रजिस्टर्ड होना :- 

अगर आप अपना अग्रीमेंट नोटरी करवा रहे है तो उसे 11 का ही बनवाए क्योकि कानून की नजर में ये अग्रीमेंट अन रजिस्टर्ड  होगा  और 11 महीने का अग्रीमेंट अन रजिस्टर्ड चल सकता है

3.प्रॉपर्टी पर केस या स्टे  :- 

मकान लेने से पहले देख ले की उस पर किसी भी प्रकार का कोई कोर्ट केस या स्टे तो नही है  कहि ऐसा न हो जाये की आप ऐसी प्रॉपर्टी ले के फस जाये


जरूरी बाते जो की रेंट अग्रीमेंट के बाद जरूरी है :-


1.पुलिस वेरिफिकेशन :- 

मकान रेंट देने के बाद मकान मालिक अपने किरायेदार की पुलिस वेरिफिकेशन करवा ले, जो की कानूनन जरूरी है अन्यथा उसे कानून को जुरमाना देना पड़ सकता है इसका provision crpc 144 में है

2.मकान का रखरखाव :– 

आप जो प्रॉपर्टी किराये पर किरायेदार को दे रहे है उसे समय-समय पर चेक करते रहे की रखरखाव व देखभाल सही प्रकार से की जा रही है या नही

3.किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट को पक्का रजिस्टर्ड कैसे करवाए :- 

पक्का किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए सबसे पहले आपको एक लिखित किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट तयार करना होगा जिसमे की दोनों पक्षों की फोटो व आधार कार्ड की फोटोकॉपी व दो गवाह उनके आधार कार्ड सहित शामिल हो तथा टोटल रेंट का (जितने भी महीने के लिए अग्रीमेंट हो) उसका अपने राज्य के अनुसार,  फीस उसके साथ शामिल करनी होगी तथा दो गवाहों की गवाही के साथ आपके छेत्र के रजिस्ट्रार ऑफिस में आपका रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड हो जायेगा

अन्य जरूरी बाते :-

मिलेगी टैक्‍स में  छूट :-  

अगर आप इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करते है तो अपना किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट दिखाकर टैक्‍स में छूट हासिल कर सकते हैं। जो लोग बिना एग्रीमेंट के किराए पर रह रहे हैं, उनको यह छूट नहीं मिल सकती है  आप चाहे तो अपने पैरेंट्स के घर में अपने को किरायेदार दिखा कर ये टैक्‍स छूट क्‍लेम कर सकते हैं। बशर्ते आपके पैरेंट्स को मिलने वाला किराया इनकम के तौर पर उनकी इनकम टैक्‍स रिटर्न में शामिल हो।

गैस कनेक्‍शन कैसे लें :- 

गैस कनेक्‍शन के लिए आप अपने किरायानामा या रेंट एग्रीमेंट की कॉपी लगा कर गैस कनेक्‍शन ले सकते है इसके अलावा जहां भी रेजीडेंस डॉक्‍यूमेंट की जरूरत पड़े। वहां आप अपना रेंट एग्रीमेंट लगा सकते हैं। इससे आपके काम आसानी से हो जाएंगे। इसके अलावा पासपोर्ट बनवाने पर भी रेंट एग्रीमेंट को आप बतौर रेजीडेंस प्रूफ दिखा सकते हैं

लॉ की डिग्री के बाद करियर – Career Options After LLB Degree in Hindi

एलएलबी यानी बैचलर ऑफ लॉ और एलएलएम यानी मास्टर ऑफ लॉ लीगल सेक्टर की सर्वोच्च प्रोफेशनल उपाधियां हैं। सामान्यतया तीन वर्षीय एलएलबी में स्नातक के बाद प्रवेश लिया जा सकता है, जबकि पांच वर्षीय एलएलबी कोर्स में बारहवीं के बाद प्रवेश लिया जा सकता है। इसके लिए एंट्रेंस टेस्ट उत्तीर्ण करना होता है। एलएलबी उत्तीर्ण करने के बाद स्नातकोत्तर के दो वर्षीय एलएलएम पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया जा सकता है। एलएलबी पूरा करने वाले युवा बार काउंसिल में पंजीकरण कराने के बाद देश की किसी भी अदालत में मुकदमों की पैरवी कर सकते हैं। क्रिमिनल, रेवेन्यू या सिविल में से कोई भी क्षेत्र चुना जा सकता है।


Career Options After LLB Degree in Hindi –

आरंभ में किसी वरिष्ठ वकील के जूनियर के रूप में अदालतों का व्यावहारिक काम सीखा जा सकता है और कुछ वर्षो के अनुभव के बाद स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की जा सकती है। एलएलएम से इस क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता (Specialization) और बढाई जा सकती है। इसके अलावा अगर लॉ के क्षेत्र में अध्यापन (Teaching) करना चाहते हैं, तो एलएलएम करने के बाद पीएचडी करके इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।

एडवोकेट के रूप में अदालतों में प्रैक्टिस करने का पारंपरिक विकल्प तो है ही, स्टेट काउंसलर, गवर्नमेंट प्रॉजीक्यूटर बनने का विकल्प भी होता है। राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली न्यायाधीश या मुंसिफ परीक्षा को उत्तीर्ण कर जज बन सकते हैं। कॉरपोरेट सेक्टर के विकसित होने से अब इस क्षेत्र में भी विधि विशेषज्ञों की मांग बढ गई है।

L.L.B की फुल फॉर्म क्या है? : Full Form of L.L.B

L.L.B की फुल फॉर्म है Legum Baccalaureus ये एक लेटिन lenguage का वर्ड है, यहाँ पर  “LL” plural legume के लिए इस्तेमाल किया गया है जिसका मतलब होता है laws. इंग्लिश में Legum Baccalaureus का मतलब होता है Bechlors of Laws

L.LB कैसे करे, क्या योग्यता है? : Qualifications For L.L.B

अगर आपके ग्रेजुएशन में कम से कम 45% मार्क्स है या आपने किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12th किया है तो आप लॉ कर सकते है, तीन वर्षीय एल.एल.बी कोर्स करने के लिए स्नातक (graduation) के बाद प्रवेश लिया जा सकता है, जबकि पांच वर्षीय एल.एल.बी कोर्स में बारहवीं (12th) के बाद प्रवेश लिया जा सकता है. कुछ यूनिवर्सिटीज में इस कोर्स को करने के लिए एंट्रेंस टेस्ट उत्तीर्ण (pass) करना अनिवार्य होता है. 5 साल वाले कोर्स के लिए ऐज लिमिट 22 साल जबकि 3 साल वाले कोर्स के लिए 45 साल है.

L.L.B करने के बाद क्या-क्या कैरियर आप्शन मौजूद है? : Career After L.L.B

Career Options After LLB Degree in Hindi

एडवोकेसी शुरू से ही एक रॉयल प्रोफेशन रहा है. L.LB करने के बाद आजकल स्टेम्प बेचने से लेकर जज बनने तक सेकड़ों कैरियर आप्शन मौजूद है, लेकिन मैं यहाँ सिर्फ टॉप 7 कैरियर आप्शन की बात करूँगा, जो आप लॉ करने के बाद अपना सकते है, तो चलिए शुरू करते है

1.आप advocate बनकर प्रेक्टिस कर सकते है :

यदि आप कोर्ट में प्रैक्टिस करने का मन बना चुके हैं, तो आपको लॉ की डिग्री लेने के बाद एक और परीक्षा से गुजरना होगा। यह परीक्षा बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council of India) लेगी। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद आप कोर्ट में प्रैक्टिस करने का अधिकार प्राप्त कर लेंगे। लॉ की पढ़ाई करके बार काउंसिल में एनरोल होने के बाद शुरुआती दौर में किसी वकील के साथ जूनियर असिस्टेंट के रूप में काम करना होता है। इस दौरान फाइलिंग, रिसर्च, अदालतों से तारीख लेना, नियोक्ता वकील के साथ अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लेना और केस ड्राफ्ट करना (मुकदमे के कागजात तैयार करना) आदि काम करने पड़ते हैं। वकालत से जुड़ी इन बुनियादी चीजों को समझने के बाद स्वतंत्र रूप से वकील के रूप में काम शुरू किया जा सकता है।

2.एन्वॉयरनमेंटल लॉयर (Environmental Lawyer) बन सकते है

एन्वॉयरनमेंट लॉ में उन चीजों को नष्ट होने से बचाने की बात की जाती है, जो हमें प्रकृति की तरफ से प्राप्त हुई हैं। इन मामलों में कई बार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन दायर की जाती हैं, जिसके लिए एन्वॉयरनमेंटल लॉ में निपुण लोगों की डिमांड होती है। इसके अलावा ऐसे एनजीओ में भी ऐसे लोगों की मांग होती है, जो एन्वॉयरनमेंट से जुडे मुद्दों को लेकर कर रहे हैं।

3.साइबर लॉयर (Cyber Lawyer)बन सकते है 

इस समय देश में ऑनलाइन और साइबर अपराध से जुडे मामले भी प्रकाश में आने लगे हैं। इसमें खासकर फर्जी और धमकी भरे ई-मेल भेजना, कंपनियों के साथ धोखा-धडी, सॉफ्टवेयर की चोरी, एसएमएस हैकिंग, मोबाइल की क्लोनिंग आदि शामिल हैं। इन सब को देखते हुए ही कंप्यूटर और नेटवर्क सुरक्षाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है। आपके पास कंप्यूटर एवं डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट बनने का भी सुनहरा अवसर है।

4.पेंटेट एंड कॉपीराइट लॉयर (Patent and Copyright Lawyer) बन सकते है

पेटेंट एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत किसी भी नई खोज से बनने वाले प्रोडक्ट पर एकाधिकार दिया जाता है। अगर कोई थर्ड पार्टी वह प्रोडक्ट बनाना चाहती है, तो उसे इसके लिए लाइसेंस लेना पडता है और उस पर रॉयल्टी देनी पडती है। बौद्धिक सम्पदा (Intellectual property) बिजनेस कंपीटेंस के प्रमुख क्षेत्र (key areas) के रूप में उभरा है। भारत में भी इससे संबंधित प्रोफेशनल्स की काफी मांग है।

5.लेबर लॉयर (Labor Lawyer) बन सकते है 

कर्मचारियों के अधिकार एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लेबर लॉ बनाया गया है। इन दिनों इस क्षेत्र से संबंधित समस्याएं अदालत में काफी संख्या में हैं। आप इसमें भी बेहतर करियर बना सकते हैं।

6.इंटरनेशनल लॉयर (International Lawyer) बन सकते है

इंटरनेशनल लॉ का अर्थ होता है अंतरराष्ट्रीय कानून। इसके तहत विभिन्न राष्ट्रों के राष्ट्रीय हितों के मध्य उत्पन्न होने वाली समस्याओं को कानून के द्वारा सुलझाया जाता है। यदि आपकी अंग्रेजी अच्छी है और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में रुचि है, तो यह क्षेत्र आपके लिए उपयुक्त है।

7.कॉरपोरेट लॉयर (Corporate Lawyer) बन सकते है 

कॉरपोरेट लॉ के जानकारों की आजकल काफी मांग है, जो विभिन्न कंपनियों को कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में सलाह देते हैं। आज के वैश्विक परिदृश्य (Global scenario) में ऐसे विशेषज्ञों के लिए अवसरों की कमी नहीं है। कुछ साल पहले तक कु्छ ही कंपनियां विदेशी कारोबार से जुड़ी हुई थीं, लेकिन अब छोटी कंपनियां भी कारोबारी जरूरत के मद्देनजर विदेशी लेनेदेन से संबद्ध होने लगी हैं।

ऐसे में उन्हें विभिन्न मामलों में कॉरपोरेट लॉ के जानकारों की मदद लेनी पड़ती है। एम एंड ए, आईपीओ, जीडीआर, टैक्सेशन, स्ट्रक्चरल फाइनेंस, बैंकिंग आदि कई ऐसे कार्यक्षेत्र हैं, जहां कॉरपोरेट लॉ फर्म्स द्वारा कंपनियों को सेवाएं दी जाती हैं। देखा जाए तो कॉरपोरेट लॉयर बनने के लिए एलएलबी के अलावा अन्य किसी डिग्री की जरूरत नहीं है। यदि आप एमबीए कर लेंगे, तो इसका आपको लाभ जरूर होगा, क्योंकि इससे अकाउंटिंग, फाइनेंस और बिजनेस का पर्याप्त ज्ञान आपको हो जाएगा। आपकी रुचि कॉरपोरेट लॉ में है। इसलिए अभी से या इस डिग्री के बाद आप अविलंब जॉब की तलाश में जुट जाएं। किसी लॉ फर्म अथवा किसी कंपनी के लीगल डिपार्टमेंट में अपने लिए रिक्तियों पर नजर रखें।

ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन : All India Bar Examination

अगर आप वकील बनकर प्रेक्टिस करना चाहते है तो उसके लिए आपको बार काउंसिल का एक एग्जाम देना होता है तो चलिए पहले उसके बारे में थोडा डिटेल से बात कर लेते है. ये परीक्षा हर उस व्यक्ति को देनी होती है जिसने लॉ में ग्रेजुएशन की हो और प्रेक्टिस करना चाहता हो. ऐसी परीक्षा बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने देशभर में पहली बार वर्ष 2010 में आयोजित की थी।

ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन परीक्षा का पैटर्नं ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन में 100 प्रश्न होंगे, जो बार काउंसिल द्वारा तीन एवं पांच वर्षीय एलएलबी के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम से पूछे जाएंगे। प्रश्न बहुविकल्पीय (Multiple Choice) होंगे एवं परीक्षा की अवधि साढे तीन घंटे रखी गई है। एग्जाम में आने वाले संपूर्ण पाठ्यक्रम को दो कैटेगरी में डिवाइड किया गया है। दोनों कैटेगरी में संपूर्ण पाठ्यक्रम को 1 से 20 चेप्टरों में डिवाइड किया गया है। प्रथम कैटेगरी में 1 से 11 तक के चेप्टर रखे गए हैं। प्रत्येक से सात प्रश्न आएंगे। दूसरे कैटेगरी में 12-20 चेप्टर रखे गए हैं, जिसमें से 23 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे।

ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन की नौ भाषाओं में होगी परीक्षा, जिसमें हिन्दी, तेलुगू, तमिल, कन्नड, मराठी, बंगाली, गुजराती, उडिया और अंग्रेजी भाषा शामिल है।

कैटेगरी-Category 1


  • अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेजोल्यूशन
  • सिविल प्रोसीजर कोड (सी.पी.सी.) ऐंड लिमिटेशन एक्ट
  • कॉन्स्टीट्यूशनल लॉ
  • कॉन्ट्रेक्ट लॉ, इनक्लूडिंग स्पेसिफिक रिलीफ, स्पेशल कॉन्ट्रेक्ट ऐंड नेगोशिएबल इन्स्ट्रूमेंट्स
  • क्रिमिनल लॉ, इंडियन पैनल कोड (आई.पी.सी.)
  • क्रिमिनल प्रोसीजर
  • ड्रॉफ्टिंग, प्लीडिंग ऐंड कन्वेंसिंग
  • इवीडेंस
  • ज्यूरिसप्यूडेंस
  • प्रोफेशनल एथिक्स ऐंड प्रोफेशनल कोड ऑफ कंडक्ट फॉर एडवोकेट्स
  • प्रॉपर्टी लॉ

कैटेगरी 2 : Category2

आप इनमें से किसी पांच चेप्टर से च्वाइस के अनुसार 23 प्रश्रनें के उत्तर दे सकते हैं।

  • एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ
  • कम्पनी लॉ   
  • एन्वॉयरनमेंटल लॉ       
  • फैमिली लॉ   
  • ह्यूमन राइट्स लॉ     
  • लेबर ऐंड इंडस्ट्रियल लॉ      
  • लॉ ऑफ टार्ट इनक्ल्यूड मोटर वेहिकल एक्सीडेंट्स ऐंड
  • कंज्यूमर प्रोटक्शन लॉ   
  • प्रिंसिपल ऑफ टेक्सेशन लॉ       
  • पब्लिक इंटरनेशनल लॉ

कुछ सवालों के जवाब – Some questions & Answers

वकालत के पेशे के लिए भारत का माहौल कैसा है? – 

देखा जाए तो यह काफी अच्छा प्रोफेशन है, क्योंकि इसमें एक वकील के रूप में कई विषयों की जानकारी होती है। मंदी के दौर में जहां हर प्रोफेशन प्रभावित हुआ, वहां लॉ प्रोफेशन पर कोई असर नहीं पड़ा। पिछले कुछ सालों में इसमें कई बदलाव देखने को मिले हैं। आने वाले समय में यह फील्ड और भी कारगर हो सकती है।
       
किस तरह के गुण एक वकील को औरों से अलग बनाते हैं? –

हालांकि शुरुआती दिनों में इस पेशे में काफी संघर्ष की स्थिति है, लेकिन एक-दो वर्षो के संघर्ष के बाद स्थिति पूरी तरह काबू में आ जाती है। लॉ की अच्छी एवं अपडेट जानकारी, कम्युनिकेशन स्किल्स, ऑन द स्पॉट जवाब देने की योग्यता जैसे गुण एक वकील को अलग श्रेणी में खड़ा कर सकते हैं।
       
शुरुआती चरण में किस तरह की दिक्कतें आती हैं? –

करियर शुरू करने पर सबसे बड़ी दिक्कत पैसे की आती है। यदि पारिवारिक बैकग्राउंड वकालत की है तो काफी फायदा पहुंचता है। एक लंबा वक्त उन्हें अपनी पहचान बनाने में लग जाता है तथा सीनियरों का सहयोग अथवा उनसे काम मिलने में परेशानी आती है, इसलिए इसमें धैर्य की बहुत जरूरत होती है।
       
दो-तीन साल प्रैक्टिस के बाद वकील कैसे आगे बढ़ सकता है? –

हालांकि हाईकोर्ट अथवा सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने में वकील को कई तरह की दिक्कतें आनी स्वाभाविक हैं, इसलिए उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि वे लोअर कोर्ट से ही अपनी प्रैक्टिस शुरू करें। 2-3 साल के बाद रुचि विकसित हो जाने के बाद अपनी फील्ड का चुनाव कर सकते हैं।

विदेशों में वकालत में कितनी संभावनाएं हैं? –

सच कहा जाए तो भारत से ज्यादा विदेशों में वकालत में संभावनाएं मौजूद हैं। आजकल बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विदेशी लोगों को यहां प्रैक्टिस की इजाजत दे रखी है। इसी तरह से यहां के लोग भी विदेशों में जाकर प्रेक्टिस कर रहे हैं। अभी इसमें और भी खुला परिदृश्य (Landscape) नजर आएगा। साथ ही कई सारी एमएनसी एवं लॉ फर्म भी भारत आ चुकी हैं।
       
रजिस्ट्रेशन संबंधी प्रक्रिया क्या है? –

जैसे ही छात्र अपना कोर्स पूरा करते हैं, उन्हें अपने अटेंडेंस सर्टिफिकेट के साथ स्टेट बार काउंसिल में अप्लाई करना होता है। एक एग्जाम के बाद उन्हें प्रैक्टिस संबंधी लाइसेंस दे दिया जाता है।


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